वैज्ञानिकों ने समुद्र की 2000 मीटर गहराई में रहने वाले जीवों पर एक महत्वपूर्ण अध्ययन किया है। अध्ययन में गहरे समुद्री जीवों के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक्स की मौजूदगी पाई गई। शोधकर्ताओं के अनुसार, करीब 92 प्रतिशत गहरे समुद्री जीवों में प्लास्टिक के कण मिले हैं। यह खोज बताती है कि प्लास्टिक प्रदूषण पृथ्वी के सबसे दूरस्थ समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों तक पहुंच चुका है। माइक्रोप्लास्टिक्स समुद्री जीवों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि इसका असर समुद्री खाद्य श्रृंखला पर भी पड़ सकता है। समुद्र की गहराइयों में प्लास्टिक पहुंचना पर्यावरणीय संकट की गंभीरता को दर्शाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक स्तर पर कदम उठाने की जरूरत है। समुद्री जीवों के जरिए ये कण मानव खाद्य प्रणाली तक पहुंचने की संभावना भी बढ़ा सकते हैं। अध्ययन ने महासागरों की सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर दिया है। वैज्ञानिक अब इसके दीर्घकालिक प्रभावों को समझने के लिए आगे शोध कर रहे हैं। Source: Source Post navigation ड्रोन युद्ध का नया दौर, Anduril का Thunder और भारत का Varun बदलेंगे आधुनिक सैन्य रणनीति इजरायली खुफिया रिपोर्ट का दावा, ईरान ने पहाड़ी सुरंगों में छिपाया परमाणु सामग्री