ओडिशा हाईकोर्ट ने आवारा पशुओं की समस्या को लेकर स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है। अदालत ने इस मामले की निगरानी के लिए यह कदम उठाया है। मामले में आवारा कुत्तों के साथ-साथ मवेशियों को भी शामिल किया गया है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 2025 के निर्देशों के आधार पर की गई है। हाईकोर्ट अब संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई और व्यवस्थाओं की समीक्षा करेगा। आवारा पशुओं के कारण सड़कों पर सुरक्षा और यातायात से जुड़ी समस्याएं सामने आती रही हैं। अदालत का उद्देश्य नागरिकों और पशुओं दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान तलाशना है। स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारियों और उपायों पर भी नजर रखी जाएगी। इस पहल से राज्य में आवारा पशु प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद है। मामले की आगे की सुनवाई में आवश्यक निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

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