हाई कोर्ट ने सूचना के अधिकार कानून और निजता से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति के निजी दस्तावेज तीसरे पक्ष को आरटीआई के जरिए उपलब्ध नहीं कराए जा सकते। इसमें मैरिज रजिस्ट्रेशन आवेदन, जन्मतिथि, पहचान पत्र और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां शामिल हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी जानकारी तभी दी जा सकती है जब कोई बड़ा जनहित जुड़ा हो। न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की एकल पीठ ने कहा कि आरटीआई का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है, लेकिन निजता की सुरक्षा भी जरूरी है। अदालत ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(जे) का हवाला देते हुए निजी सूचनाओं को संरक्षित बताया। मामले में याचिकाकर्ता द्वारा विवाह पंजीयन से जुड़े दस्तावेज मांगे गए थे। अधिकारियों और राज्य सूचना आयोग ने पहले भी जानकारी देने से इनकार किया था। हाई कोर्ट ने दो याचिकाओं को खारिज करते हुए निजता के अधिकार को प्राथमिकता दी। एक अन्य मामले में कोर्ट ने सूचना आयोग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और आदेश को रद्द कर 90 दिनों में दोबारा निर्णय लेने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि सूचना आयोग को केवल प्रशिक्षण या प्रक्रियात्मक सुझाव देने के बजाय कानून के अनुसार जानकारी देने या रोकने का फैसला करना चाहिए। Source: Source Post navigation यूनाइटेड स्पिरिट्स ने एफएसएसएआई के फ्लेवरिंग आदेश को हाई कोर्ट में दी चुनौती उपभोक्ता आयोग का फैसला: बीमा कंपनियां बहाने बनाकर क्लेम नहीं रोक सकतीं, 13.54 लाख भुगतान के आदेश