5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद क्षेत्र की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। उस समय पाकिस्तान में इस फैसले के विरोध में कई प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। सात साल बाद नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कुछ इलाकों में असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। मुजफ्फराबाद, मीरपुर और रावलाकोट जैसे क्षेत्रों में लोग कथित तौर पर प्रशासनिक समस्याओं और आर्थिक मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। स्थानीय लोगों में इस्लामाबाद की नीतियों को लेकर नाराजगी की बातें सामने आई हैं। वहीं भारत के नियंत्रण वाले जम्मू-कश्मीर में सरकार विकास और शांति बहाली के प्रयासों को प्रमुखता दे रही है। बुनियादी ढांचे, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। धारा 370 हटने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक बदलावों पर लगातार चर्चा जारी है। दोनों हिस्सों की स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे और नजरिए सामने आते रहे हैं। जम्मू-कश्मीर का भविष्य क्षेत्रीय राजनीति और विकास नीतियों के लिहाज से महत्वपूर्ण बना हुआ है। Source: Source Post navigation अखिलेश यादव का आरोप: ईवीएम पर उठते सवालों से ध्यान हटाने के लिए भाजपा ने उपचुनाव जानबूझकर हारे रायपुर पुलिस व्यवस्था में सुधार की मांग, भाजपा सांसद बृजमोहन ने उठाया स्टाफ की कमी का मुद्दा