इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ्लैट की डिलीवरी में देरी के मामले में RERA के आदेश को बरकरार रखा। मामले में होमबायर ने फ्लैट के लिए ₹35.9 लाख का भुगतान किया था। इसके बावजूद 13 साल तक उसे फ्लैट का कब्जा नहीं मिल सका। अदालत ने बिल्डर की ओर से मामले को दोबारा खोलने की याचिका खारिज कर दी। बिल्डर ने काफी देरी के बाद अपना पक्ष दोबारा रखने की मांग की थी। अदालत ने इस देरी को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के बिना कानूनी रूप से फ्लैट का कब्जा सौंपा हुआ नहीं माना जा सकता। लंबे समय तक कब्जा नहीं मिलने के कारण बिल्डर पर आर्थिक देनदारी बनी रही। बिल्डर को देरी की अवधि के लिए 24 प्रतिशत ब्याज चुकाने का निर्देश दिया गया। हाईकोर्ट ने ₹41.21 लाख की बकाया राशि से जुड़े RERA आदेश को कायम रखा। इस फैसले से होमबायर को वर्षों से चल रही कानूनी लड़ाई में राहत मिली। मामले का फैसला लंबे समय से चले आ रहे विवाद का अंत करता है।

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