सुप्रीम कोर्ट ने B.Pharm डिग्री से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि अमान्य जाति प्रमाणपत्र के आधार पर छात्र की डिग्री रोकी नहीं जा सकती। मामले में छात्रा ने ओपन कैटेगरी की फीस का भुगतान किया था। उसने B.Pharm का पूरा कोर्स भी सफलतापूर्वक पूरा किया था। इसके बावजूद उसके शैक्षणिक दस्तावेज रोके गए थे। छात्रा ने इस कार्रवाई के खिलाफ कानूनी राहत की मांग की थी। मामला पहले बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ के सामने गया था। हाई कोर्ट ने छात्रा को राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद Cynthia Julious Charlie ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने इन अपीलों को स्वीकार कर लिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से छात्रा के शैक्षणिक दस्तावेजों को रोके जाने की कार्रवाई पर सवाल उठा। अदालत ने कोर्स पूरा करने और ओपन कैटेगरी की फीस जमा करने के तथ्य को महत्वपूर्ण माना। यह फैसला ऐसे मामलों में शैक्षणिक डिग्री और दस्तावेजों के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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