छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में निचली अदालत की उम्रकैद की सजा रद्द कर दी। कोर्ट ने आरोपी देवप्रकाश यादव को हत्या के आरोपों से बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत के अनुसार मजबूत शक भी कानूनी सबूत का विकल्प नहीं हो सकता। मामले में अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण पेश नहीं कर सका। सितंबर 2014 में मुकेश यादव की हत्या का आरोप देवप्रकाश और उसके पिता बंशी यादव पर लगा था। आरोप था कि दोनों ने लकड़ी के डंडे से मुकेश पर हमला किया था। घटना के बाद शव को रेलवे लाइन के पास स्थित तालाब में फेंकने का आरोप था। पोस्टमार्टम में सिर की चोट, सदमा और अधिक रक्तस्राव को मौत का कारण बताया गया था। निचली अदालत ने बंशी यादव को बरी कर दिया था, जबकि देवप्रकाश को उम्रकैद सुनाई थी। हाईकोर्ट की सुनवाई में सामने आया कि हत्या का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। मृतक के परिजनों ने आरोपी के घर जाने और वापस न लौटने की आशंका जताई थी। डिवीजन बेंच ने पर्याप्त सबूत के अभाव में निचली अदालत का फैसला पलट दिया।

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