तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर की मजबूत मांग के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया। रिपोर्ट के अनुसार RBI ने रुपये में ज्यादा गिरावट रोकने के लिए डॉलर की बिक्री कराई। सरकारी बैंकों की ओर से डॉलर की पेशकश को केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप का संकेत माना जा रहा है। लगातार हस्तक्षेप के कारण रुपया करीब दो सप्ताह से सीमित दायरे में बना हुआ है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ रहा है। कंपनियों की डॉलर मांग ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव ने मुद्रा बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है। कमजोर शेयर बाजार का असर भी रुपये की धारणा पर पड़ा है। RBI की सक्रिय भूमिका से रुपये में तेज उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिली है। बाजार में केंद्रीय बैंक की कार्रवाई को मुद्रा स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि तेल कीमतों और डॉलर की मांग से जुड़े दबाव अभी बने हुए हैं। आने वाले दिनों में रुपये की दिशा वैश्विक बाजार और RBI के हस्तक्षेप पर निर्भर रह सकती है। Source: Source Post navigation मंगल पर जाने का सपना, ‘भारत में संभव नहीं’ सुनकर बनाया NoPo; अब कार्बन नैनोट्यूब की टेक्नोलॉजी बढ़ा रहा स्टार्टअप त्योहारी सीजन से पहले Amazon-Flipkart का नया शुल्क नियम, सेलर्स ने बढ़ते आर्थिक बोझ पर जताई चिंता