IIT के पूर्व छात्र अपने संस्थानों को बड़े पैमाने पर आर्थिक योगदान दे रहे हैं। इन दान से मेडिकल स्कूल, हॉस्टल, रिसर्च और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किए जा रहे हैं। कई पूर्व छात्रों ने सैकड़ों करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई है। राकेश गंगवाल ने IIT कानपुर के लिए 400 करोड़ रुपये देने का वादा किया है। नंदन नीलेकणि ने IIT बॉम्बे को अब तक कुल 400 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। डॉ. कृष्ण चिवुकुला ने IIT मद्रास को 228 करोड़ रुपये का दान दिया है। इन योगदानों से देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों की क्षमताओं को बढ़ाने में मदद मिल रही है। पूर्व छात्रों का सहयोग नए शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना में भी उपयोग किया जा रहा है। यह प्रवृत्ति सफल IIT स्नातकों की अपने संस्थानों के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कई पूर्व छात्र विदेशों में सफल करियर और बड़े कारोबार बनाने के बाद भारत के शिक्षा क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं। आर्थिक सहयोग के साथ उनकी विशेषज्ञता और अनुभव भी संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। IIT से निकली संपदा और विशेषज्ञता का वापस संस्थानों की ओर प्रवाह अब एक नई मिसाल बन रहा है।

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