सोनीपत के न्यूरोलॉजिस्ट संजीव घनगस ने बताया कि पार्किंसन रोग (PD) केवल उम्र बढ़ने की सामान्य कमजोरी नहीं, बल्कि एक प्रगतिशील न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है जो मस्तिष्क के डोपामिनर‑उत्पादक कोशिकाओं को न्यूनतम करती है। शुरुआती लक्षणों में हाथ‑पैरों में हल्की कंपकंपी, चलने‑फिरने में छोटा‑छोटा झटके, हिलते‑डुलते समय संतुलन खोना, लिखावट का छोटा‑होना और चेहरे की अभिव्यक्ति में कमी शामिल हैं। कई लोग इन संकेतों को उम्र या तनाव से जोड़कर अनदेखा कर देते हैं, जिससे उपचार में देरी होती है और रोग तेजी से बिगड़ता है। घनगस ने ज़ोर देकर कहा कि शुरुआती पहचान पर दवाओं और फिजिकल थैरेपी से रोग की प्रगति को धीमा किया जा सकता है, जीवन की गुणवत्ता बनी रहती है और दैनिक कार्यों में आत्मनिर्भरता लौट आती है। नियमित जांच, सही पोषण और शारीरिक व्यायाम को अपनाकर इस गंभीर बीमारी से बचाव संभव है।

By AIAdmin