कई लोग ChatGPT और Gemini जैसे AI चैटबॉट्स के साथ निजी जानकारी साझा करते हैं। इन चैट्स का इस्तेमाल कुछ परिस्थितियों में AI मॉडल को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। यूजर्स के इंटरैक्शन से मॉडल की ट्रेनिंग और सुधार में मदद मिल सकती है। हालांकि, कई AI कंपनियां यूजर्स को डेटा इस्तेमाल से बाहर निकलने यानी ऑप्ट-आउट का विकल्प देती हैं। इन प्राइवेसी कंट्रोल्स की सेटिंग अलग-अलग कंपनियों में अलग हो सकती है। कई बार ये विकल्प आसानी से नजर नहीं आते और सेटिंग्स के भीतर मौजूद होते हैं। यूजर्स को समय-समय पर अपनी AI प्राइवेसी सेटिंग्स की समीक्षा करनी चाहिए। इसे ब्राउजर की परमिशन जांचने की तरह नियमित आदत बनाया जा सकता है। किसी AI असिस्टेंट पर ऐसी संवेदनशील जानकारी अपलोड करने से बचना चाहिए जिसे आप किसी अन्य जगह साझा नहीं करेंगे। निजी दस्तावेजों और बेहद संवेदनशील डेटा को चैटबॉट्स के साथ साझा करते समय विशेष सावधानी जरूरी है। डेटा इस्तेमाल से जुड़ी नीतियों को समझने के बाद उपलब्ध प्राइवेसी विकल्पों का उपयोग किया जा सकता है। AI सेवाओं का इस्तेमाल करते समय अपनी निजी जानकारी की सुरक्षा की जिम्मेदारी यूजर के स्तर पर भी महत्वपूर्ण रहती है।

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