NEET पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन अब छात्र हितों से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। आंदोलन के दौरान CJP की सक्रिय भूमिका ने उसे प्रमुख राजनीतिक केंद्र में ला खड़ा किया। पार्टी ने छात्रों के मुद्दों को लगातार उठाते हुए अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश की। इसके साथ ही कांग्रेस की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे कि वह आंदोलन में अपेक्षित प्रभाव क्यों नहीं छोड़ सकी। आम आदमी पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों की रणनीति भी चर्चा का विषय बनी रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम ने विपक्षी दलों के बीच नई प्रतिस्पर्धा पैदा की है। छात्र आंदोलन के राजनीतिक स्वरूप लेने से विभिन्न दलों ने अपनी-अपनी रणनीति अपनाई। शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। आंदोलन के नेतृत्व और जनसमर्थन को लेकर विपक्षी दलों के बीच तुलना भी तेज हुई। आने वाले समय में इस घटनाक्रम का विपक्ष की राजनीति पर व्यापक असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल यह मामला छात्र आंदोलन और राजनीतिक रणनीति, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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