फिलिस्तीनियों पर इजरायल का युद्ध कभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और दुनिया का ध्यान इस ओर से भटक गया है। ईरान के साथ होने वाले कथित समझौते की चर्चाओं ने इस मुद्दे को हाशिए पर धकेल दिया है। जमीनी हकीकत यह है कि वहां हिंसा और अस्थिरता का दौर लगातार जारी है। वैश्विक राजनीति में अन्य मुद्दों को प्राथमिकता मिलने से फिलिस्तीन की त्रासदी ओझल हो गई है। लोग यह भूल रहे हैं कि वहां का संघर्ष प्रतिदिन कई जिंदगियों को प्रभावित कर रहा है। शांति की उम्मीदें धूमिल होती जा रही हैं और स्थानीय आबादी भारी संकट का सामना कर रही है। मीडिया कवरेज में कमी के कारण वैश्विक चेतना से यह मुद्दा गायब सा हो गया है। मानवीय दृष्टिकोण से यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक और उपेक्षा का शिकार है। दुनिया की उदासीनता ने फिलिस्तीन के घावों को और गहरा कर दिया है। संघर्ष का कोई ठोस समाधान न निकल पाने के कारण वहां हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं।

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