छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने न्यायिक कामकाज स्थगित करने को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि केवल बार एसोसिएशन के शोक प्रस्ताव के आधार पर पूरे दिन की न्यायिक कार्यवाही स्थगित नहीं की जा सकती। न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल ने रायपुर के रेंट कंट्रोलर का एक आदेश रद्द कर दिया। इस आदेश के तहत 2 फरवरी 2026 को सूचीबद्ध सभी मामलों की सुनवाई स्थगित कर दी गई थी। सुनवाई स्थगित करने का आधार जिला बार एसोसिएशन की ओर से रखा गया शोक प्रस्ताव था। हाईकोर्ट ने इस आधार पर पूरे दिन न्यायिक कार्य रोकने के निर्णय को उचित नहीं माना। अदालत के फैसले से न्यायिक कार्यों की निरंतरता और अनुशासन पर जोर दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शोक संवेदना जैसे अवसरों को न्यायिक प्रक्रिया के निर्धारित कामकाज से अलग तरीके से देखा जाना चाहिए। पूरे दिन मामलों की सुनवाई रोकने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हाईकोर्ट का यह आदेश निचली अदालतों के न्यायिक कामकाज के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फैसले में न्यायिक कार्य स्थगित करने के लिए उचित आधार और प्रक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया गया। Source: Source Post navigation लोन की रकम गारंटर से सीधे वसूल सकती है बैंक? इलाहाबाद HC ने दिया अहम फैसला भिवानी में 3 लाख की लूट के दो दोषियों को 5-5 साल की सजा, 10-10 हजार रुपये जुर्माना