अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने वैश्विक नीतियों पर तकनीकी अरबपतियों के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने जी7 शिखर सम्मेलन में प्रमुख एआई कंपनियों के नेताओं की मौजूदगी पर सवाल उठाए। खन्ना का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और सार्वजनिक हित को कॉर्पोरेट प्रभाव से ऊपर रखा जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिकी स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का हवाला देते हुए इस प्रवृत्ति की आलोचना की। रो खन्ना ने अत्यधिक संपन्न लोगों पर अधिक कर लगाने की वकालत की। उनका मानना है कि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सार्वजनिक सेवाओं के लिए संसाधन जुटाए जा सकते हैं। इस बीच एक लीक हुई चैट ने भी बहस को तेज कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, सिलिकॉन वैली के कुछ प्रभावशाली उद्योगपति कैलिफोर्निया में प्रस्तावित 5 प्रतिशत संपत्ति कर का विरोध करने की रणनीति बना रहे थे। इससे यह संकेत मिलता है कि संभावित कर वृद्धि को लेकर तकनीकी क्षेत्र के बड़े निवेशकों में चिंता है। एआई शासन और आर्थिक नीतियों पर निजी कंपनियों की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीकों के नियमन में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही आवश्यक है। वहीं, आलोचकों का कहना है कि अत्यधिक आर्थिक शक्ति नीति निर्माण को प्रभावित कर सकती है। यह मुद्दा अब अमेरिका में कर व्यवस्था, तकनीकी उद्योग और लोकतांत्रिक संस्थाओं के संबंधों पर व्यापक चर्चा का केंद्र बन गया है।

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