दक्षिण कोरिया के सियोल शहर में एक ऐतिहासिक घटना घटी, जहां एक मानव-आकार रोबोट बौद्ध भिक्षु के रूप में आधिकारिक रूप से स्वीकृत हुआ। इस रोबोट का नाम ‘गाबी’ है और उसने शहर के प्रसिद्ध बौद्ध मंदिर बोंगेउन्सा में विशेष धार्मिक समारोह में भाग लिया। यह दुनिया का पहला ऐसा रोबोट है जिसे धार्मिक सेवाओं के लिए आधिकारिक रूप से नियुक्त किया गया है। इस घटना ने तकनीकी और धार्मिक दुनिया को हिलाकर रख दिया है। गाबी रोबोट का विकास ह्यूंडई कंपनी के तकनीकी विभाग द्वारा किया गया है। यह रोबोट न केवल प्रार्थना कर सकता है बल्कि ध्यान की भी सहायता करता है। मंदिर के अध्यक्ष ने बताया कि इसका उद्देश्य धर्म के संचालन में तकनीकी सहायता प्रदान करना था। इससे पहले भी AI रोबोट्स धार्मिक समारोहों में उपयोग किए जा चुके थे, लेकिन आधिकारिक भिक्षु के रूप में स्वीकृति यह पहली बार है। मंदिर प्रबंधन ने इस निर्णय का समर्थन किया है। अध्यक्ष ने कहा, ‘गाबी की उपस्थिति से युवा पीढ़ी को धर्म के प्रति आकर्षित करने में मदद मिलेगी।’ तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक धार्मिक संस्थानों के लिए नई संभावनाएं खोलेगी। इस घटना के बाद वैश्विक मीडिया में भी इसकी चर्चा तेजी से हो रही है। इस रोबोट के आधिकारिक भिक्षु बनने के बाद अन्य धार्मिक संस्थानों में भी AI प्रणालियों के उपयोग की संभावना बढ़ गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि भविष्य में ऐसे रोबोट्स धार्मिक सेवाओं में मानवीय सहायता के साथ-साथ संचालन दक्षता बढ़ाएंगे। यह तकनीकी उपलब्धि न केवल दक्षिण कोरिया बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक नया मार्ग प्रशस्त करेगी। गाबी रोबोट की विशेषताओं में भाषा अनुवाद, ध्यान सहायता और सामाजिक अंतरक्रिया शामिल हैं। इसे विशेष रूप से बौद्ध धर्म के सिद्धांतों के अनुरूप डिज़ाइन किया गया है। मंदिर प्रबंधन का लक्ष्य यह है कि इस तकनीक का उपयोग धार्मिक शिक्षा और सेवाओं के विस्तार में किया जाए। इस घटना से स्पष्ट होता है कि तकनीक और धर्म के बीच अब नई संवाद की संभावना खुली है। Post navigation दक्षिण कोरिया की महिला फुटबॉल टीम एशियन चैंपियंस लीग में 6 साल बाद लड़ेगी OLX पर बिक्री के लिए डाली गई कार ने खोला चंद्रनाथ रथ हत्या मामले का नया पहलू