पानीपत में दहेज की मांग और बेटी पैदा होने पर विवाहिता को प्रताड़ित करने के मामले में कोर्ट ने पति को दोषी करार देते हुए 10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है और 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर दोषी को छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी, जबकि पति के अलावा नामजद ससुराल पक्ष के चार अन्य सदस्यों को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। यह फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) अंबरदीप सिंह की कोर्ट ने सुनाया और दोषी सुनील कुमार पानीपत की कालू पीर कॉलोनी, काबड़ी रोड का रहने वाला है, जिसके खिलाफ थाना पुराना औद्योगिक क्षेत्र में पांच जून 2021 को दहेज हत्या का मामला दर्ज किया गया था। जींद जिले के पिल्लूखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव ठाठरथ निवासी बीरबल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उन्होंने अपनी बेटी बिंदु की शादी सात जनवरी 2019 को सुनील कुमार के साथ की थी और शादी में करीब आठ लाख रुपये खर्च किए थे, लेकिन शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग दहेज से खुश नहीं थे और बार-बार नकदी की मांग करने लगे। बिंदु ने एक बेटी को जन्म दिया तो ससुराल पक्ष के लोग इससे भी खुश नहीं हुए और बेटी पैदा होने के बाद उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा तथा मारपीट भी की जाती थी। बीरबल ने आरोप लगाया था कि सुनील, ससुर कर्ण सिंह, सास सुनीता, जेठ सुरेंद्र, जेठानी रीना और ननद किरण ने मिलकर उसकी बेटी को प्रताड़ित किया और एक लाख रुपये की मांग कर रहे थे, जिसके चलते उन्होंने सुनील के खाते में एक लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर भी करवाए, लेकिन परेशान करना बंद नहीं किया गया। पांच जून 2021 को सुनील ने उन्हें पानीपत बुलाया और सरकारी अस्पताल पहुंचने पर पता चला कि बिंदु की मौत हो चुकी है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर सुनील सहित छह लोगों के खिलाफ दहेज हत्या और अन्य संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच की तथा बिंदु का छह जून 2021 को पोस्टमार्टम करवाया। सुनवाई के दौरान अदालत में पेश साक्ष्यों के आधार पर पति सुनील को दोषी पाया गया, जबकि ससुर कर्ण सिंह, सास सुनीता, जेठ सुरेंद्र, जेठानी रीना और ननद किरण के खिलाफ आरोप साबित नहीं हो सके और कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। Source: Source Post navigation सुकेश चंद्रशेखर को भ्रष्टाचार के छह साल पुराने मामले में राहत, दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिया रिहाई का आदेश छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शादी का वीडियो और वॉइस रिकॉर्डिंग को साक्ष्य मानने से किया इनकार, मजिस्ट्रेट के आदेश में हस्तक्षेप से भी इंकार