छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फतवे और उसके कानूनी प्रभाव को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि फतवे में किसी व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार करने या उसके कानूनी अधिकारों को खत्म करने की कोई शक्ति नहीं है। फतवे का कोई बाध्यकारी कानूनी प्रभाव नहीं होता और इसे किसी व्यक्ति के अधिकारों को नुकसान पहुंचाने के लिए लागू नहीं किया जा सकता। यह मामला एक महिला के शिया मुस्लिम युवक से विवाह के बाद कथित तौर पर जारी किए गए फतवे से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि कानून के तहत सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं। फतवे के आधार पर किसी के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। इस फैसले से धार्मिक मामलों में कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई है। अदालत ने मामले में सुनवाई के बाद यह टिप्पणी की। Source: Source Post navigation JNKVV कुलपति नियुक्ति पर हाईकोर्ट सख्त: UGC के आयु मानदंडों से अधिक उम्र का मामला, शासन को नोटिस अमेरिका में दरवाजा बंद करते समय महिला के पैर के नाखून में चोट: बीमा कंपनी ने क्लेम किया खारिज, उपभोक्ता आयोग ने 944 डॉलर और 30 हजार रुपये मुआवजे का आदेश दिया