बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय चुनाव आयोग को छह मतदाताओं के नाम बहाल करने का आदेश दिया है। विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान परिवार के उचित अनुरोधों के बावजूद उनके नाम हटा दिए गए थे। अदालत ने निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी को उनके पते के सत्यापन के बाद दस दिनों के भीतर उनके नाम मतदाता सूची में शामिल करने का निर्देश दिया है। चुनाव आयोग ने तर्क दिया कि नाम हटाने का कारण सिस्टम की सीमाएं और अप्रोसेस्ड फॉर्म थे। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि नागरिकों के मतदान के अधिकार का संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इस फैसले से प्रभावित परिवार को राहत मिली है।

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