मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यूनियन कार्बाइड द्वारा इंडिया में उत्पन्न हुए विषाक्त कचरे से जुड़े एक महत्त्वपूर्ण आदेश जारी किया। कोर्ट ने कंपनी को 900 मीट्रिक टन बचे हुए राख का टॉक्सिसिटी (विषाक्तता) मूल्यांकन तैयार करके पेश करने का निर्देश दिया, जिससे इसके पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों का स्पष्ट आंकलन हो सके। यह कदम उन सॉल वेस्ट प्रबंधन मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने की दिशा में है, जिनसे स्थानीय समुदायों को कई सालों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने यह भी तय किया कि निष्कर्षों की समीक्षा के बाद ही कचरे के निपटान या पुनः उपयोग के बारे में आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। अगली सुनवाई 22 जून को निर्धारित की गई है, जहाँ पक्षकारों को अपना-अपना दायरा और संभावित निपटान योजना पेश करनी होगी। इस निर्णय को पर्यावरण विशेषज्ञों ने सकारात्मक माना है, क्योंकि यह भविष्य में संभावित प्रदूषण को रोकने के लिये महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा। Post navigation ज्येष्ठ माह 2026 : 19 साल बाद पुनः आयी 8 ग्रहों का दुर्लभ संगम एक बार कह दो जरूरत नहीं… बृजभूषण सिंह का बड़ा बयान, कहा 2027-29 चुनाव में दिखा देंगे हमारी उपयोगिता