रायपुर के एक विशेष न्यायालय ने अंधविश्वास से जुड़े इलाज में महिला की मौत के मामले में आरोपी ईश्वरी साहू को हत्या का आरोप लगा कर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह मामला पिछले वर्ष एक ग्रामीण महिला की अचानक मृत्यु से शुरू हुआ, जिसकी रिपोर्ट में कहा गया था कि उसे असंतोषजनक उपचार के नाम पर प्रयोगात्मक दवाएँ दी गयीं। जांच में पता चला कि आरोपी ने इन दवाओं के उपयोग से महिला की मृत्यु को छिपाने के लिये झूठी गवाही दी थी। अदालत ने यह संकेत दिया कि ऐसे झोलाछाप उपचारों को रोकना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है और जिम्मेदार व्यक्तियों को कठोर सजा दी जानी चाहिए। न्यायालय ने गवाहों और मेडिकल रिपोर्टों को प्रमुख साक्ष्य के रूप में मानते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिससे भविष्य में ऐसे कुकृत्य को रोकने की आशा जताई जा रही है।