निगरानी से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में अपनी दलील रखी। केंद्र ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर निजता की उम्मीद करना विरोधाभासी है। सरकार ने निगरानी व्यवस्था और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। याचिका में सार्वजनिक निगरानी और निजता के अधिकार से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया। केंद्र ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर गतिविधियां पूरी तरह निजी नहीं मानी जा सकतीं। मामले में निजता के अधिकार और सुरक्षा जरूरतों के बीच संतुलन पर चर्चा हुई। हाईकोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई करेगा। याचिका में निगरानी प्रणालियों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामले का फैसला नागरिक अधिकारों और सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

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