छत्तीसगढ़ के 51 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले करीब 20 लाख बच्चों की बुनियादी स्वास्थ्य सुरक्षा अफसरों की लापरवाही की शिकार है। केंद्र सरकार मानती है कि 3 से 6 साल के बच्चों को प्री-प्राइमरी पढ़ाई और खेलकूद गतिविधियों के दौरान बच्चों को हल्की-फुल्की चोट लगना, बुखार आना या डिहाइड्रेशन होना आम बात है। इसी आपात स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार हर साल ‘मेडिसिन किट’ (फर्स्ट एड) के लिए करीब साढ़े 7 से 8 करोड़ रुपए का बजट देती है। इसके बावजूद, महिला एवं बाल विकास विभाग यह जरूरी दवाएं नहीं खरीद रहा है, जिससे बजट लैप्स हो रहा है। ऐसा क्यों? : पड़ताल में खुलासा हुआ है कि विभाग के अधिकारी बच्चों की सेहत से जुड़ी इस खरीदी को प्राथमिकता ही नहीं दे रहे हैं। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, अफसर इस प्रक्रिया को ‘झंझट’ और ‘गैर-जरूरी’ मानते हैं। सीजीएमएससी के मना करते ही अफसरों ने झाड़ा पल्ला भास्कर की पड़ताल के मुताबिक, वर्ष 2021-22 और 2022-23 में शासन ने केंद्र सरकार की एजेंसी एचएलएल के माध्यम से एक कंपनी से किट सप्लाई करवाई थी। उस समय सभी केंद्रों तक दवाएं पहुंची थीं। लेकिन इसके बाद जब सीजीएमएससी ने टेंडर प्रक्रिया की जिम्मेदारी लेने से हाथ खींच लिए, तो महिला एवं बाल विकास विभाग ने हाथ पर हाथ धर लिए। पहले अलग-अलग व्यवस्थाओं के जरिए इमरजेंसी के लिए प्राथमिक इलाज की सामग्री मिल जाती थी, लेकिन अब हालात इतने बदतर हैं कि हजारों केंद्रों में मामूली फर्स्ट एड की व्यवस्था भी नहीं है। किट में क्या रहेगा सब तय, फिर भी लापरवाही कार्यकर्ताओं का छलका दर्द: बच्चों को चोट लगने पर दूसरों से मांगना पड़ता है सामान भास्कर ने राजधानी सहित आस-पास 24 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से फोन पर संपर्क किया। ज्यादातर ने माना कि कई बार बच्चे पहुंचते हैं तो उन्हें बुखार रहता है। खेलते समय गिरना-पड़ना आम है। हल्की चोटें भी आती हैं, पर केंद्रों में ऐसा कोई साधन नहीं है कि प्राथमिक उपचार किया जा सके या संक्रमण से बचाने के लिए मलहम-पट्टी की जा सके। कई बार मजबूरी में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से दवा या पट्टी का सामान मांगना पड़ता है। बच्चों को बुखार आने पर भी कई बार हमारे सामने दुविधा की स्थिति बनती है। केंद्र में कोई साधन नहीं होता तो बाहर से मदद लेनी पड़ती है।” पूर्व में क्यों नहीं हुई है, परीक्षण किया जा रहा हमने स्वास्थ्य विभाग से पूछा है कि मेडिसिन किट में क्या-क्या दवाइयां उपलब्ध कराई जा सकती हैं। जानकारी आने के बाद किट की खरीदी की जाएगी पूर्व में क्यों नहीं की गई इस बारे में परीक्षण किया जा रहा है। -डॉ रेणुका श्रीवास्तव, संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग Source: Source Post navigation कर्मचारी हड़ताल पर, व्यवस्था चरमराई अगालपुर में जन शिकायत शिविर: कलेक्टर ने सुनीं 116 समस्याएं, 20 का मौके पर किया समाधान