अहमदाबाद के एक ग्राहक ने 2019 में कपड़ों की खरीदारी के दौरान अतिरिक्त जीएसटी वसूले जाने के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और करीब सात साल बाद जीत हासिल की। ग्राहक चिराग झा ने सितंबर 2019 में ब्रांड फैक्ट्री से कई सामान खरीदे थे। इनमें 299 रुपये की छूट वाली एक शॉर्ट्स भी शामिल थी। शॉर्ट्स के प्राइस टैग पर स्पष्ट लिखा था कि उसकी कीमत में सभी कर शामिल हैं। इसके बावजूद उनसे अतिरिक्त 15 रुपये जीएसटी के रूप में वसूले गए। चिराग झा ने इस अतिरिक्त वसूली पर आपत्ति जताई और उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। उनका तर्क था कि जब उत्पाद की कीमत में सभी कर शामिल होने की जानकारी दी गई थी, तो अलग से जीएसटी लेना उचित नहीं था। इस मामले के निपटारे में करीब सात साल लग गए। सुनवाई के दौरान उपभोक्ता आयोग ने कीमत संबंधी विसंगतियों पर ध्यान दिया। आयोग ने ब्रांड फैक्ट्री को अतिरिक्त वसूले गए 15 रुपये वापस करने का आदेश दिया। इसके अलावा कंपनी को चिराग झा को 4,000 रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया गया। विवादित राशि पर ब्याज देने का भी आदेश दिया गया। यह मामला उपभोक्ताओं के अधिकारों और उत्पादों पर प्रदर्शित कीमतों के अनुसार भुगतान सुनिश्चित करने के महत्व को रेखांकित करता है। Source: Source Post navigation टेक्सास में किराये के मकान से निकलने के बाद मरम्मत खर्च पर विवाद, अदालत ने किरायेदार को 880 डॉलर लौटाने का फैसला बरकरार रखा परिवहन निगमों में टिकट बुक गायब होने पर हाईकोर्ट सख्त, मांगी जांच रिपोर्ट