अमेरिका की एक महिला ने दावा किया है कि जिस दवा के लिए उसे अपने देश में लगभग 1,000 डॉलर खर्च करने पड़ते थे, वही दवा भारत से केवल करीब 25 डॉलर में उपलब्ध हुई। बीमा कंपनी द्वारा दवा का खर्च वहन न किए जाने के बाद उसने वैकल्पिक तरीका अपनाते हुए कनाडा की एक फार्मेसी के जरिए भारतीय निर्माता से दवा मंगवाई। दवा की कीमत में भारी अंतर देखकर महिला ने अमेरिका की स्वास्थ्य व्यवस्था और दवा मूल्य निर्धारण प्रणाली पर सवाल उठाए। उसका कहना है कि मरीजों को कई बार अत्यधिक कीमत चुकानी पड़ती है। इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दवा की कीमतों और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर चर्चा छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि विभिन्न देशों में दवाओं की कीमतें अलग-अलग नीतियों और बाजार संरचना के कारण बदलती हैं। यह मामला दवा उपलब्धता और किफायती स्वास्थ्य सेवा की बहस को फिर से सामने लाया है। Source: Source Post navigation ट्रंप के बार-बार ‘डील जल्द होगी’ दावों पर सवाल, ईरान युद्ध खत्म होने के संकेत अब तक अधूरे भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती, रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी बढ़ाने पर सहमति