लखनऊ। ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में मान्यता देने से इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इनकार करने के मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि वह हाईकोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय की खंडपीठ या सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करेगी। इस कानूनी मामले ने राज्य के पंचायत राज व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन के संचालन को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा कर दिया है। सरकार इस कदम के जरिए यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनी रहे। फिलहाल, इस आदेश के बाद पंचायत प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला पंचायती राज अधिनियम की व्याख्या से जुड़ा है, जिस पर आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि वह इस मुद्दे पर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन पर इस फैसले के संभावित प्रभावों का भी सरकार आकलन कर रही है। आने वाले दिनों में कोर्ट के रुख पर पूरे राज्य की नजरें टिकी होंगी।

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