केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि कौन-सी जांच करानी है, इसका फैसला डॉक्टर करेंगे, मरीज नहीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि CT स्कैन या MRI जैसी जांच डॉक्टर की सलाह और चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर ही कराई जाती हैं। यह फैसला एक पूर्व सैनिक की याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने सिर में दर्द के लिए स्कैन कराने की मांग की थी। हालांकि, याचिकाकर्ता के पास डॉक्टर से परामर्श लेने का पर्याप्त प्रमाण नहीं था। अदालत ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि डॉक्टर ने जांच से इनकार किया या अस्पताल की ओर से कोई गलत कार्रवाई हुई। कोर्ट ने बताया कि प्रारंभिक जांच और मरीज की स्थिति का आकलन करने के बाद ही डॉक्टर आवश्यक डायग्नोस्टिक टेस्ट निर्धारित करते हैं। याचिकाकर्ता को किसी भी उपयुक्त अस्पताल में जाकर चिकित्सकीय सलाह लेने की स्वतंत्रता दी गई है। Source: Source Post navigation फरीदकोट में LADC नीति के विरोध में वकीलों का प्रदर्शन तेज, भूख हड़ताल जारी रखने की चेतावनी कथित शराब घोटाला मामले में चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से राहत, जमानत बरकरार