पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फॉरेंसिक जांच में देरी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मामला लुधियाना जिले के दाखा थाने में दर्ज हत्या के प्रयास के केस से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार नवंबर 2024 में एक आरोपी ने किराना दुकान पर पहुंचकर शिकायतकर्ता और उसकी पत्नी से विवाद किया था। आरोप है कि आरोपी ने रिवॉल्वर से फायरिंग कर दोनों को घायल कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी की लापरवाही के कारण किसी आरोपी को अनिश्चित समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने लुधियाना एसएसपी को देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पाया कि महत्वपूर्ण केस प्रॉपर्टी को एफएसएल भेजने में डेढ़ साल से अधिक की देरी हुई। आरोपी के वकील ने बताया कि उसका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह लंबे समय से जेल में बंद है। अदालत ने यह भी माना कि सभी गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और आरोपी से कोई रिकवरी लंबित नहीं है। हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए तेज सुनवाई को आरोपी का मौलिक अधिकार बताया। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को नियमित जमानत प्रदान कर दी। Source: Source Post navigation पेपर लीक मामलों पर सख्ती, नए बिल में 10 साल तक जेल और 10 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रस्ताव 30 साल पुराने भ्रष्टाचार मामलों पर EOW की कार्रवाई तेज, 50 केसों में चालान या खात्मा रिपोर्ट पेश