बिलासपुर सेंट्रल जेल में रहने वाली छह साल की बच्ची खुशी की कहानी सामने आई है। खुशी अपने पिता के साथ जेल परिसर में रह रही थी। उसके पिता जेल में बंद हैं। खुशी की मां का निधन उसके जन्म के कुछ समय बाद ही हो गया था। एक जिला कलेक्टर की नजर खुशी पर पड़ी और उन्होंने उससे बातचीत की। बातचीत के दौरान खुशी ने अच्छे स्कूल में पढ़ने की इच्छा जाहिर की। उसकी इस इच्छा ने अधिकारी को उसके भविष्य के लिए कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। एक IAS अधिकारी की पहल से खुशी का दाखिला जैन इंटरनेशनल स्कूल में कराया गया। उसके लिए पढ़ाई के साथ रहने की व्यवस्था भी की गई। इस पहल से खुशी को जेल की चारदीवारी से बाहर एक नई दुनिया देखने का अवसर मिला। शिक्षा ने उसके सामने आगे बढ़ने और बेहतर भविष्य बनाने की नई संभावनाएं खोलीं। खुशी की कहानी बताती है कि सही समय पर मिला अवसर किसी बच्चे के जीवन की दिशा बदल सकता है।

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