GIFT City के दूसरी पीढ़ी के नियम नियामकीय व्यवस्था में बदलाव का संकेत देते हैं। इन नियमों से नियामक की भूमिका केवल प्रचारक या बिक्री बढ़ाने वाले संस्थान से आगे बढ़ती दिखती है। अब नियामक अधिक निगरानी और पर्यवेक्षण की भूमिका में नजर आ रहा है। यह बदलाव GIFT City के संस्थागत विकास को दर्शाता है। नए नियमों से कई तकनीकी और संचालन संबंधी पहलुओं को अधिक स्पष्ट किया गया है। हालांकि, कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। अब मुख्य चुनौतियां तकनीकी नहीं बल्कि वैधानिक प्रकृति की हैं। मौजूदा ढांचे में कुछ कानूनी सीमाएं प्रभावी नियमन के रास्ते में बाधा बन सकती हैं। नियामक के परिपक्व होने के साथ उसके अधिकारों और जिम्मेदारियों का स्पष्ट होना जरूरी है। इसके लिए संबंधित वैधानिक प्रावधानों में बदलाव की आवश्यकता हो सकती है। GIFT City की अगली प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि इन वैधानिक कमियों को कितनी प्रभावी ढंग से दूर किया जाता है। Source: Source Post navigation लुधियाना के होटल पार्क प्लाजा में बैंक की रेड, भारी पुलिस बल तैनात; अधिकारियों की पूछताछ जारी BBA छात्र ने 3 महीने Rapido चलाकर कमाए ₹1,200 रोज, बोले- अब समझ आया गिग वर्क का दर्द