भारतीय रुपया शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे मजबूत हुआ। इस मजबूती के पीछे अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी प्रमुख कारण रही। अमेरिकी ट्रेजरी की एक घोषणा के बाद डॉलर पर दबाव बढ़ा। ट्रेजरी ने लंबी अवधि वाले बॉन्ड की बायबैक बढ़ाने की योजना का ऐलान किया है। इस कदम से डॉलर की चाल प्रभावित हुई। डॉलर के कमजोर होने से रुपये को शुरुआती कारोबार में समर्थन मिला। अमेरिकी मुद्रा मई के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, रुपये की स्थिरता के सामने कच्चे तेल की ऊंची कीमतें चुनौती बनी हुई हैं। महंगे क्रूड से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इससे आगे चलकर रुपये की मजबूती प्रभावित होने की आशंका है। मुद्रा बाजार में निवेशकों की नजर डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। फिलहाल रुपये को डॉलर की कमजोरी से राहत मिली है, लेकिन क्रूड की ऊंची कीमतें जोखिम बनी हुई हैं।

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