भारतीय रुपया शुक्रवार, 30 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे मजबूत होकर 95.19 के स्तर पर पहुंच गया। रुपये की मजबूती से आयातकों को राहत मिल सकती है। डॉलर के कमजोर होने की वजह वैश्विक बाजार के संकेत और अमेरिकी फेड के फैसले को माना जा रहा है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी से भी रुपये को सहारा मिला है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में रुपये की चाल आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी। डॉलर इंडेक्स में गिरावट का असर रुपये पर पड़ा है। निवेशकों की नजर महंगाई और ब्याज दरों से जुड़े आंकड़ों पर टिकी है। रुपये की मजबूती से महंगाई पर भी असर पड़ सकता है। विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है। Source: Source Post navigation 7 शहरों में 1 लाख घर बिके, फिर भी बढ़ा बिना बिके मकानों का स्टॉक; खरीदारों को जल्दबाजी से बचने की सलाह शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी: सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में, लेकिन ग्लोबल मार्केट के इन संकेतों ने बढ़ाई चिंता