सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार को एक बार फिर झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की ‘हिमाचल प्रदेश रिक्रूटमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस ऑफ गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एक्ट, 2024’ से संबंधित रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दिया है। यह फैसला राज्य के लगभग 1.50 लाख कर्मचारियों के लिए राहत भरा है। रिव्यू पिटीशन खारिज होने के बाद कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को सभी लाभ डेट ऑफ फर्स्ट अपॉइंटमेंट से देने होंगे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकार की स्पेशल लीव पिटीशन भी खारिज कर चुका है और तब कोर्ट ने राज्य सरकार को चार महीने के भीतर कर्मचारियों के सभी वित्तीय लाभ का भुगतान करने के आदेश दिए थे। आर्थिक तंगहाली से जूझ रही सरकार ने इन आदेशों की अनुपालना करने के बजाय रिव्यू पिटीशन का फैसला लिया, लेकिन उसे राहत नहीं मिल सकी। हिमाचल हाईकोर्ट के एडवोकेट सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन खारिज होने के बाद सरकार के पास इस मामले में अब कोई कानूनी राहत का विकल्प नहीं बचता। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनुपालना राज्य सरकार के लिए बड़ी वित्तीय चुनौती बन सकती है। अनुमान है कि कॉन्ट्रैक्ट अवधि के सेवा लाभ देने के लिए सरकार को करीब 8,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। सरकार पर पहले से ही आर्थिक दबाव है और कर्मचारी-पेंशनरों को नए वेतनमान के एरियर व अन्य लाभों के रूप में करीब 8,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना बाकी है। यदि कॉन्ट्रैक्ट अवधि के लाभों का अनुमानित 8,000 करोड़ रुपये का बोझ भी जुड़ता है, तो कुल लंबित देनदारी करीब 16,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। हाईकोर्ट पहले ही इस एक्ट को निरस्त कर चुका है और सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिलने के बाद सरकार को अदालत के फैसले का पालन करना होगा तथा कर्मचारियों को उनकी पात्रता के अनुसार नियुक्ति की मूल तिथि से मिलने वाले सेवा लाभ देने होंगे। Source: Source Post navigation 5 लाख बीमित कार 2019 में आग से जलकर खाक: 7 साल बाद उपभोक्ता आयोग का आदेश, बजाज अलियांज को 5.75 लाख देने का निर्देश