अंबाला कैंट के बोह गांव से जनवरी 2020 में लापता हुए स्वर्णजीत सिंह के मामले में नया मोड़ आया है। लापता होने के तीन दिन बाद पुलिस को एक अधजली लाश मिली थी, जिसकी पहचान परिवार ने स्वर्णजीत सिंह के रूप में की थी और इसके बाद हत्या के मामले में चार लोगों को आरोपी बनाया गया था। अब अधिवक्ता तरुण दत्ता के मुताबिक, लाश का DNA स्वर्णजीत के पिता और मां दोनों से मैच नहीं हुआ है, जिससे लाश की पहचान पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस लाश का परिवार ने स्वर्णजीत सिंह समझकर अंतिम संस्कार कर दिया, वह किसकी थी, जबकि स्वर्णजीत सिंह का छह साल बाद भी पता नहीं चल पाया है। DNA रिपोर्ट सामने आने के बाद आरोपी पक्ष हाईकोर्ट में केस रद्द कराने की तैयारी कर रहा है। पुलिस में दर्ज FIR के मुताबिक, बोह गांव निवासी करीब 40 साल का स्वर्णजीत सिंह गाड़ी चलाने का काम करता था और 27 जनवरी 2020 को दोपहर करीब 12:30 बजे अपनी टाटा जेस्ट कार लेकर घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। पिता दिलीप सिंह ने तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला, जिसके बाद 31 जनवरी 2020 को महेश नगर थाने में FIR दर्ज की गई। पुलिस को 30 जनवरी 2020 को एक अधजली लाश मिली और परिजनों ने उसे स्वर्णजीत सिंह का शव बताया। अधिवक्ता तरुण दत्ता के मुताबिक, पुलिस ने लाश और स्वर्णजीत के पिता के DNA सैंपल मधुबन स्थित FSL भेजे, लेकिन दोनों के DNA मैच नहीं हुए, जिसके बाद शिकतकर्ता के आवेदन पर कोर्ट ने 2025 में मां का सैंपल लिया, लेकिन अब आई रिपोर्ट में मां और लाश का DNA भी मैच नहीं हुआ है। मामले में चार आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से एक की ट्रायल के दौरान जेल में मौत हो गई, जबकि उनके मुवक्किल जरनैल सिंह करीब ढाई साल तक जेल में रहे और बाद में हाईकोर्ट से जमानत मिली तथा बाकी आरोपियों को भी जमानत मिल चुकी है। तरुण दत्ता का कहना है कि DNA रिपोर्ट के बाद वह अपने मुवक्किल की ओर से हाईकोर्ट में केस रद्द कराने के लिए याचिका दायर करेंगे। Source: Source Post navigation जबलपुर में पेंट के डिब्बों में छिपाकर लाया जा रहा था गांजा: पुलिस और क्राइम ब्रांच ने 4 करोड़ रुपये के गांजे के साथ दो आरोपी दबोचे सोनीपत में गैस एजेंसी के बाहर से सिलेंडर चोरी CCTV में कैद: बाइक सवार दो युवक उठाकर ले गए, मैनेजर ने की पहचान; केस दर्ज