गुरुग्राम में सेक्टर-70 स्थित जीपीएल सोसाइटी के सामने यूनिटेक प्लॉटिंग की साइड पर खुले पड़े 12 फीट गहरे सीवरेज के गड्ढे में एक बछड़ा गिर गया, जो पिछले दो दिनों से अंदर फंसा हुआ था। राहगीरों ने इसकी जानकारी राष्ट्रीय बजरंग दल को दी। जिलाध्यक्ष और टिकली मंडल उपाध्यक्ष आशीष शर्मा की अगुवाई में तरुण और आनंद अपनी टीम लेकर मौके पर पहुंचे और पुलिस को बुलाकर रेस्क्यू अभियान चलाया। एक घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बछड़े को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों में खुले पड़े सीवरेज और मैनहोल को लेकर बिल्डर के खिलाफ आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यहां कोई बड़ी इंसानी दुर्घटना भी हो सकती थी। आशीष शर्मा ने बताया कि जब वे टीम के साथ पहुंचे तो बछड़ा बेहद दयनीय स्थिति में था। सीवरेज के गहरे गड्ढे में फंसे होने के कारण वह पूरी तरह थक चुका था और हिलने-डुलने की स्थिति में भी नहीं था। अगर समय रहते सूचना न मिलती और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू न किया जाता तो बछड़े की जान भी जा सकती थी। वह पिछले दो दिनों से मौत और जिंदगी के बीच झूल रहा था। गड्ढे के अंदर गिरने और दो दिनों तक भूखे-प्यासे फंसे रहने की वजह से उसके शरीर पर कई जगह गहरे घाव हो चुके थे। हादसे की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन की टीम भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस और राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने रस्सियों और स्थानीय संसाधनों की मदद से करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बछड़े को 12 फीट गहरे गड्ढे से सुरक्षित बाहर निकाला। बाहर निकालने के बाद बछड़े की हालत को देखते हुए तुरंत उसका प्राथमिक उपचार शुरू किया गया। बछड़े के शरीर पर लगे घावों की सफाई की गई और उस पर दवाई लगाकर उचित ट्रीटमेंट दिया गया। गंदगी में सने होने के कारण बछड़े को अच्छे से नहलाया भी गया, जिसके बाद उसकी हालत में सुधार देखने को मिला। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बछड़े का मालिक भी सूचना पाकर मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि यह बछड़ा पिछले दो दिनों से अचानक लापता हो गया था और वे लगातार उसे आसपास के इलाकों में तलाश रहे थे, लेकिन उसका कहीं सुराग नहीं मिल पा रहा था। बछड़े को सही-सलामत और सुरक्षित पाकर राहत की सांस ली। स्थानीय निवासियों ने यूनिटेक प्लॉटिंग साइड और संबंधित विभाग से मांग की है कि सेक्टर-70 के इस पूरे बेल्ट में जितने भी सीवरेज और गड्ढे खुले पड़े हैं, उन्हें तुरंत ढका जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों।

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