दिवाली और त्योहारी सीजन की आड़ में शहर के ईवी स्कूटरी डीलर्स स्कूली बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं और सरकार को भी चपत लगा रहे हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के नोटिफिकेशन और सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के मुताबिक बिना रजिस्ट्रेशन और बिना नंबर प्लेट के केवल वही इलेक्ट्रिक स्कूटरी बेची या चलाई जा सकती हैं, जिनकी स्पीड लिमिट 25 किमी/घंटा हो। लेकिन शहर के ईवी डीलर्स अधिक बिक्री के चक्कर में लोगों को गुमराह कर 45 से 60 किमी/घंटा की रफ्तार से भागने वाली स्कूटरी यह कहकर बेच रहे हैं कि इसमें न नंबर प्लेट की जरूरत है न लाइसेंस की। उनका यह भी दावा रहता है कि पुलिस भी ऐसे वाहनों को नहीं रोकती। असलियत जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने शहर के अलग-अलग ईवी शोरूम्स का रियलिटी चेक किया। कानून के मुताबिक 16 साल से कम उम्र के बच्चों का बिना लाइसेंस किसी भी प्रकार का वाहन चलाना गैर-कानूनी है। कम स्पीड वाले इलेक्ट्रिक स्कूटर केवल व्यस्क चालकों के लिए बिना लाइसेंस की छूट के साथ आते हैं, लेकिन नाबालिगों के हाथों में 50-60 की स्पीड से दौड़ती ई-स्कूटी देना बेहद खतरनाक है। कई ई-स्कूटी निर्माताओं द्वारा लगाए जा रहे स्पीड बटन सरासर मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन हैं। सरकारी नियम के तहत बिना रजिस्ट्रेशन छूट प्राप्त वाहनों के लिए मोटर पावर 600 वॉट से कम, अधिकतम रफ्तार 25 किमी प्रति घंटा से कम और सीएटी सर्टिफिकेट होना जरूरी है। इससे ज्यादा क्षमता या स्पीड वाली स्कूटरी का आरटीओ से रजिस्ट्रेशन, आरसी, नंबर प्लेट और ड्राइविंग लाइसेंस होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। गिल रोड स्थित शोरूम के सेल्समैन ने कहा कि 40 हजार से 60 हजार रुपये तक के जितने भी मॉडल हैं, किसी में नंबर प्लेट नहीं लगती और इनकी स्पीड 50 से 60 प्रति घंटा है। 13 वर्षीय साहिल कुमार ने बताया कि वे रोजाना इलेक्ट्रिक स्कूटर से ट्यूशन और स्कूल जाते हैं और यह स्कूटर आराम से 50 की स्पीड पर चला जाता है। मनीषा ने बताया कि वो भी अपनी सेहली के साथ बिना नंबर प्लेट वाली स्कूटरी पर जाती है और कोई पुलिस वाले नहीं रोकते। ढोलेवाल चौक के पास स्थित डीलर ने निसंकोच कहा कि किसी भी मॉडल में नंबर प्लेट की जरूरत नहीं है और आज तक न किसी ने रोका है और न ही चालान हुआ है। पूर्व एसीपी गुरदेव सिंह ने कहा कि 4 साल से तेज गति वाले ई-स्कूटर बिना नंबर प्लेट के बेचे जा रहे हैं।

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