चंडीगढ़ सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एमडी-एमएस दाखिलों को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एससी आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों पर चंडीगढ़ में 1 नवंबर 1966 से रहने की अतिरिक्त शर्त लगाने पर आपत्ति जताई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दाखिले की पात्रता प्रॉस्पेक्टस में तय नियमों के अनुसार ही निर्धारित होगी और संस्थान बाद में कोई नई शर्त जोड़कर अभ्यर्थियों के अधिकार सीमित नहीं कर सकता। इससे एससी श्रेणी के अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। जस्टिस सुवीर सहगल और जस्टिस राजेश गौर की खंडपीठ ने रुद्रांश कालेर व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं ने एमडी-एमएस सत्र 2026 के दाखिलों के लिए जारी प्रॉस्पेक्टस में एससी आरक्षण का लाभ केवल चंडीगढ़ प्रशासन से जारी बोनाफाइड एससी प्रमाणपत्र रखने वाले अभ्यर्थियों तक सीमित करने के प्रावधान को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि वे चंडीगढ़ के निवासी हैं और यहां अधिसूचित अनुसूचित जातियों से संबंधित हैं, उनके पास सक्षम अधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र हैं, उन्होंने जीएमसीएच-32 से ही एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है और नीट पीजी-2022 परीक्षा एससी श्रेणी में पास की है, इसके बावजूद दाखिले में ऐसी अतिरिक्त शर्तें लगाई जा रही हैं जिनसे उनकी पात्रता प्रभावित हो रही है। संस्थान ने संविधान के अनुच्छेद 341 का हवाला देते हुए दलील दी कि अनुसूचित जाति की स्थिति और आरक्षण का लाभ संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश तक सीमित रहता है। हालांकि हाईकोर्ट ने प्रॉस्पेक्टस की शर्तों की जांच में पाया कि इसमें कहीं भी यह अनिवार्यता नहीं है कि अभ्यर्थी के पिता या पूर्वज 1 नवंबर 1966 से पहले चंडीगढ़ में रह रहे हों। अदालत ने कहा कि सरकारी निर्देशों के आधार पर प्रॉस्पेक्टस में ऐसी नई पात्रता शर्त नहीं जोड़ी जा सकती जिसका उसमें उल्लेख नहीं है और दाखिले की पात्रता और मेरिट तय करने के लिए प्रॉस्पेक्टस ही आधार होगा। खंडपीठ ने जीएमसीएच और संबंधित अधिकारियों को एमडी-एमएस सत्र 2026 के लिए एससी श्रेणी की मेरिट सूची प्रॉस्पेक्टस में निर्धारित शर्तों के अनुसार तैयार कर प्रकाशित करने का निर्देश दिया है और आरक्षण का दावा करने वाले सभी अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की नियमानुसार जांच कर उनकी आपसी मेरिट तय करने को कहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह किसी व्यक्तिगत अभ्यर्थी की पात्रता पर फैसला नहीं दे रही है और संस्थान को सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से निर्धारित नियम लागू करने होंगे। इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका और लंबित अन्य अर्जियों का निपटारा कर दिया। Source: Source Post navigation सुसाइड नोट में आरोप लगाने भर से कोई अपराधी नहीं हो जाता: दिल्ली हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश: SIR के दौरान हटाए गए सांता क्रूज़ परिवार के छह सदस्यों के नाम बहाल करे चुनाव आयोग, 10 दिन में मतदाता सूची में शामिल करने का निर्देश