महाराष्ट्र के नासिक की 54 वर्षीय महिला को बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरोगेसी की अनुमति दे दी है। आयु सीमा के कारण सरोगेसी की अनुमति न मिलने पर दंपती ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट के फैसले में सरोगेसी कानून के उद्देश्यपूर्ण अर्थ पर जोर दिया गया है। कोर्ट का मकसद सरोगेट माताओं और सरोगेसी से जन्मे बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना है। मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत दंपती को पात्रता के लिए एक ‘समग्र इकाई’ माना गया है। इस फैसले से सरोगेसी से जुड़े मामलों में अहम मिसाल कायम हुई है। Source: Source Post navigation विभागीय देरी से छूटा IPS बनने का मौका: रिटायरमेंट के बाद चंडीगढ़ कैट ने दी नियुक्ति, 2022 की चयन सूची में था दूसरा स्थान BS-VI नियमों पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: NCR के वकीलों को मिली राहत, गैर-BS-VI वाहनों पर रोक के बीच बड़ा आदेश