भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में लंबित एरियर मामले में हिमाचल प्रदेश को सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जीत मिली है। यह दावा मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने किया। चंबा के मेहला में मीडिया से बातचीत में सीएम ने कहा कि इस कानूनी लड़ाई के बाद हिमाचल को आने वाले वर्षों में बड़ा आर्थिक लाभ होगा। बीबीएमबी मामले में सुप्रीम कोर्ट से आए फैसले की विस्तृत जानकारी एडवोकेट जनरल अनूप रत्न दोपहर एक बजे मीडिया को देंगे। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हिमाचल को अपने हिस्से की बिजली मिलने का रास्ता मजबूत हुआ है। इस बिजली को बाजार में बेचकर प्रदेश हर साल 500 से 1000 करोड़ रुपए तक कमा सकता है। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेशवासियों की जीत बताते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने चार साल के कार्यकाल में प्रदेश के हकों की चौथी बड़ी लड़ाई जीती है। उन्होंने कहा कि अगर नीयत नेक हो और पूरी लगन से प्रयास किए जाएं तो बड़ी से बड़ी लड़ाई भी जीती जा सकती है। उन्होंने इस सफलता के लिए मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों, अधिकारियों और सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश का पक्ष रखने वाले अधिवक्ताओं का आभार जताया। मुख्यमंत्री के अनुसार अगले 20 वर्षों तक हिमाचल को अपने हिस्से की बिजली मिलेगी। यदि इसे 6 रुपए प्रति यूनिट की दर से बेचा जाता है तो प्रदेश को सालाना करीब 500 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है, वहीं 15.50 रुपए प्रति यूनिट की दर मिलने पर यह कमाई करीब 1000 करोड़ रुपए सालाना तक पहुंच सकती है। सीएम ने कहा कि बीबीएमबी का मामला प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई में वर्तमान सरकार की चौथी बड़ी जीत है। इससे पहले सरकार वाइल्ड फ्लावर हॉल, जेएसडब्ल्यू और किशाऊ बांध परियोजना के मामलों में हिमाचल के हितों की लड़ाई लड़ चुकी है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि केंद्र और प्रदेश में डबल इंजन सरकार होने के बावजूद हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई क्यों नहीं लड़ी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, वाटर सेस और चंडीगढ़ में हिमाचल की हिस्सेदारी के मुद्दे पर अभी लड़ाई लड़नी बाकी है। उन्होंने भरोसा जताया कि हिमाचल प्रदेश वर्ष 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनेगा।

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