छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CGMSC के रिएजेंट खरीदी मामले में आरोपी मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा को राहत देने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने एफआईआर, चार्जशीट और आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मामला केवल अनुबंध और भुगतान विवाद तक सीमित नहीं है। इसमें सरकारी खरीद प्रक्रिया में साजिश, भ्रष्टाचार और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर की शर्तें इस तरह तैयार की गईं जिससे मोक्षित कॉर्पोरेशन को लाभ मिले। हमर लैब योजना के तहत करीब 314 करोड़ रुपये के रिएजेंट खरीदे गए थे। आरोप है कि जरूरी सुविधाओं के अभाव में लगभग 161 करोड़ रुपये के रिएजेंट खराब हो गए। कंपनी के निदेशक ने दावा किया था कि यह भुगतान और अनुबंध से जुड़ा मामला है। राज्य सरकार ने कहा कि यह गंभीर आर्थिक अपराध का मामला है जिसकी जांच ट्रायल के दौरान होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने माना कि मामले में साक्ष्यों का परीक्षण निचली अदालत में ही किया जाएगा।

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