किसी कर्मचारी की मौत के बाद परिवार को फैमिली पेंशन, ग्रैच्युटी और प्रोविडेंट फंड जैसे लाभ मिल सकते हैं। लेकिन कानूनी वारिस होने भर से इन सभी पर अपने आप हक नहीं बन जाता। हर लाभ के लिए अलग नियम और पात्रता तय है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि फैमिली पेंशन का हक संबंधित सर्विस रूल्स से तय होता है। फैमिली पेंशन आमतौर पर कर्मचारी के जीवनसाथी को मिलती है। पति या पत्नी के न होने पर बच्चों को पेंशन का हक मिल सकता है। ग्रैच्युटी और प्रोविडेंट फंड के मामले में नामांकन और नियमों का पालन जरूरी है। नियमों के अनुसार, पेंशन का लाभ पाने के लिए पात्रता साबित करनी होती है। कई मामलों में कानूनी वारिस और पेंशन पाने का अधिकारी अलग-अलग हो सकते हैं। कर्मचारी को अपने नामांकन को समय-समय पर अपडेट रखना चाहिए। अगर कर्मचारी ने नामांकन नहीं किया है, तो नियमों के अनुसार वारिस का निर्धारण होता है। फैमिली पेंशन का दावा करते समय आवश्यक दस्तावेज जरूरी होते हैं। नियमों की जानकारी न होने से कई बार परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए कर्मचारियों को अपने सेवा नियमों की जानकारी रखनी चाहिए। Source: Source Post navigation बिलासपुर सेंट्रल जेल से 19 बंदियों की रिहाई, 15-16 साल की सजा काटने के बाद भी अटकी थी मुक्ति; शासन की मंजूरी से मिली आजादी तेलंगाना हाई कोर्ट का अहम फैसला: बर्खास्त 35 जूनियर लेक्चरर बहाल, कहा- बर्खास्तगी से पहले उचित जांच जरूरी