यमुनानगर के गांव दौलतपुर मालियान की सरपंच पिंकी रानी को मंडल आयुक्त न्यायालय से भी राहत नहीं मिली। आशा वर्कर के पद पर रहते हुए सरपंच का चुनाव लड़ने और दोनों पदों से मानदेय लेने के आरोपों से जुड़े मामले में मंडल आयुक्त अंबाला ने उनकी अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही उपायुक्त की ओर से 21 जनवरी 2026 को उन्हें सरपंच पद से हटाने के जारी आदेश को भी बरकरार रखा गया है। मामले की शुरुआत गांव की निवासी ममतेश पत्नी विनोद कुमार की शिकायत से हुई थी। उन्होंने 27 अक्टूबर 2025 को प्रशासन को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि पिंकी रानी सरपंच होने के साथ आशा वर्कर के रूप में भी काम कर रही हैं और दोनों पदों का मानदेय प्राप्त कर रही हैं। शिकायत पर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, सरस्वतीनगर से रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट के आधार पर उपायुक्त कार्यालय ने 23 दिसंबर 2025 को पिंकी रानी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। प्रशासन के अनुसार पिंकी रानी का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, जिसके बाद 21 जनवरी 2026 को उन्हें सरपंच पद से हटाने के आदेश जारी कर दिए गए। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए पिंकी रानी ने मंडल आयुक्त अंबाला के समक्ष अपील दायर की थी। अपील में उन्होंने शिकायत को व्यक्तिगत रंजिश और राजनीतिक गुटबाजी से प्रेरित बताया। उन्होंने दलील दी कि वह 2007 से आशा वर्कर के तौर पर काम कर रही हैं, लेकिन विभाग ने उन्हें कभी नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया। सुनवाई के दौरान मंडल आयुक्त ने दोनों पक्षों की दलीलों के साथ उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों का अवलोकन किया। डीडीपीओ नरेंद्र सिंह के अनुसार आदेश में इस तथ्य का उल्लेख किया गया कि पिंकी रानी ने सरपंच का चुनाव लड़ने से पहले 12 अक्टूबर 2022 को आशा वर्कर के पद से त्यागपत्र देने की बात कही थी, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उन्होंने त्यागपत्र नहीं दिया। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद मंडल आयुक्त ने उनकी अपील को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। इस फैसले के साथ उपायुक्त की ओर से सरपंच पद से हटाने के आदेश पर मंडल आयुक्त की मुहर लग गई है।

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