आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने बच्चों की कस्टडी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने पिता की ओर से दायर हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि रिट अदालतें बच्चों के हितों से जुड़े विस्तृत तथ्यों की जांच नहीं कर सकतीं। ऐसे मामलों का समाधान उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों की अभिरक्षा से जुड़े विवादों का निपटारा गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट के प्रावधानों के अनुसार होना चाहिए। यदि किसी सक्षम अदालत में पहले से अभिभावकता से संबंधित मामला लंबित है, तो उसी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चों के सर्वोत्तम हित का निर्धारण साक्ष्यों और विस्तृत जांच के आधार पर ही संभव है। इसलिए हैबियस कॉर्पस याचिका इस तरह के विवादों के समाधान का उपयुक्त माध्यम नहीं है। अदालत ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह फैसला बाल अभिरक्षा मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी मार्गदर्शन माना जा रहा है। Source: Source Post navigation छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला, महिला आयोग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नहीं मिलेगा श्रम सम्मान निधि योजना का लाभ GTB अस्पताल में मरीज पर गिरा सीलिंग फैन, मौत पर विवाद; परिजनों ने उठाए सवाल