एक 62 वर्षीय महिला ने अमेरिका में रहते हुए दरवाजा बंद करते समय अपने पैर के नाखून में चोट लगा ली थी और उसने अपने ट्रैवल बीमाकर्ता से मुआवजे का दावा किया था। इलाज के बाद शुरुआत में अपर्याप्त दस्तावेजों और रिकॉर्ड के कारण उसका क्लेम खारिज कर दिया गया था। चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाया और बीमा कंपनी को अनुचित व्यापार प्रथाओं का दोषी पाया। आयोग ने बीमा कंपनी को 944.61 डॉलर की राशि के साथ-साथ मानसिक पीड़ा के लिए 30,000 रुपये मुआवजे और मुकदमे के खर्च का भुगतान करने का आदेश दिया है। यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण में अहम माना जा रहा है। बीमा कंपनी की ओर से अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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