छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस ने संदिग्ध हालत में 4 करोड़ रुपये कैश जब्त किए थे और इस रकम को वापस पाने के लिए कारोबारी कमलेश आर. शाह ने डायरेक्ट कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसमें उन्होंने कहा कि उनके खाते में 53 करोड़ से ज्यादा रकम है, लेकिन कोर्ट ने शुक्रवार को उनकी याचिका खारिज कर दी है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अंजली सिंह की कोर्ट ने कारोबारी के दोनों आवेदनों पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले की जांच आयकर विभाग ने शुरू कर दी है, ऐसे में जांच पूरी होने तक जब्त की गई रकम कारोबारी को वापस नहीं दी जा सकती। दरअसल, खुर्सीपार पुलिस को 25 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे सूचना मिली थी, जिसके बाद रायपुर-दुर्ग मुख्य मार्ग पर वाहन जांच के दौरान सफेद रंग की बोलेरो मैक्स पिकअप को रोका गया। पिकअप के पिछले हिस्से में सीक्रेट चेंबर मिला, जिसे खोलने पर 500, 200 और 100 रुपये के नोटों में कुल 4 करोड़ रुपये मिले। पिकअप में सवार भवेशभाई जीनाभाई डाभी और विष्णुदेव दुबे से रकम का हिसाब और दस्तावेज मांगे गए और संतुष्ट न होने पर गाड़ी व पूरी रकम जब्त कर ली गई। कारोबारी कमलेश शाह ने अपने वकील राकेश पुरी के जरिए कोर्ट में आवेदन देकर जब्त रकम की वापसी की मांग की और बताया कि उनकी पत्नी नीना शाह मेसर्स मेक टेक नाम से कृषि से जुड़ा कारोबार चलाती थीं, जो हर साल करोड़ों का कारोबार करती है और टैक्स भी जमा करती है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में फर्म ने 1 करोड़ 8 लाख 22 हजार 242 रुपये आयकर जमा किया था, जबकि 2025-26 की ऑडिट रिपोर्ट में फर्म के पास नकद और बैंक खातों में कुल 53 करोड़ 93 लाख 69 हजार 148.72 रुपये होने की जानकारी दी गई। पत्नी की 12 अक्टूबर 2025 को मौत के बाद अकोला कोर्ट ने उन्हें कानूनी वारिस घोषित किया है और उनकी बेटियां खुशबू व खुशाली भी कारोबार की कानूनी वारिस हैं। कारोबारी ने कोर्ट को बताया कि व्यापार के काम से समय-समय पर कैश एक जगह से दूसरी जगह ले जाई जाती है और 25 अक्टूबर को भी जेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की गाड़ी से 4 करोड़ रुपये रायपुर से नागपुर ले जाए जा रहे थे। पुलिस और आयकर विभाग ने रकम लौटाने का विरोध करते हुए कहा कि गाड़ी में पकड़े गए दोनों लोगों ने शुरुआती पूछताछ में इस रकम को जेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन और जय श्री गोल्डन मार्केट, भनपुरी रायपुर के ट्रांसपोर्ट कारोबार का पैसा बताया था, जबकि बाद में कमलेश शाह ने इसे मेक टेक फर्म का पैसा बताया, इसलिए रकम का असली मालिक और सोर्स जांचना जरूरी है। आयकर विभाग ने कोर्ट को बताया कि आयकर अधिनियम की धारा 132A समेत संबंधित प्रावधानों के तहत 9 पन्नों की जांच शुरू कर दी गई है और जांच पूरी होने तक रकम किसी को नहीं सौंपने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कारोबारी की याचिका और रकम किसी दूसरे विभाग को ट्रांसफर नहीं करने की मांग वाला आवेदन भी खारिज कर दिया।

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