नवा रायपुर के तूता में चित्रोत्पला फिल्म सिटी के लिए पेड़ों की कटाई का विरोध तेज होने लगा है। इसके खिलाफ माना-तूता जंगल संघर्ष समिति ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई है। समिति ने इस पूरे मामले को लेकर छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी को पत्र लिखा है। नवा रायपुर सरपंच संघ के पूर्व अध्यक्ष सुजीत कुमार घिदौड़े ने कहा कि किसी भी कीमत पर पेड़ों की कटाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि विरोध सरकार के विकास कार्यों से नहीं है और न ही फिल्म सिटी बनाने के खिलाफ है, लेकिन इसके लिए दूसरी जगह का चयन किया जाना चाहिए। समिति के सदस्य कृणाल सिन्हा ने कहा कि जंगल को बचाने के लिए पिछले 9 महीने से निगरानी कर रही समिति आने वाले दिनों में और मजबूती से काम करेगी और इस मुद्दे को जन आंदोलन बनाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि पर्यटन मंडल के एमडी 1100 पौधे लगाने का दावा कर रहे हैं, जबकि मौके पर गिनती में 530 पौधे ही मिले और वे भी सूख चुके हैं। इस साल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर फिल्म सिटी परिसर में टूरिज्म बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारियों ने करीब 1,000 पौधे लगाए थे। समिति ने 28 अक्टूबर को स्मृति ईरानी को पत्र लिखकर पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। समिति ने कहा है कि माना-तूता का मानव निर्मित जंगल रायपुर से करीब 10 किलोमीटर दूर है और दशकों की मेहनत से बंजर व पथरीली जमीन पर विकसित यह जंगल जैव विविधता और पर्यावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण है। समिति ने फिल्म सिटी के लिए नवा रायपुर में दूसरी जगह सैकड़ों एकड़ खाली जमीन उपलब्ध होने का दावा करते हुए फिल्म सिटी किसी दूसरी जगह बनाने की मांग की है। बता दें कि 27 अक्टूबर से पेड़ों की कटाई दोबारा शुरू हो गई है। इसकी जानकारी मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पेड़ों से लिपटकर कटाई रोकने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस के साथ उनकी झूमाझटकी भी हुई और पुलिस 10 ग्रामीणों को माना थाने ले गई। सूचना मिलने पर कांग्रेस के शहर और ग्रामीण जिला अध्यक्ष समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता थाने पहुंचे और घेराव किया, जिसके करीब एक घंटे बाद पुलिस ने ग्रामीणों को छोड़ दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में कई पेड़ 30 से 40 साल पुराने हैं और फिल्म सिटी के लिए करीब 100 एकड़ क्षेत्र में निर्माण प्रस्तावित है, जिससे बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होने की आशंका है।

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